- भूतपूर्व गृह मंत्री ननकी राम कंवर भी धरने पे..
- घर मे आग लगवाई ! नल कनेक्शन काटा!
- अब गुंडे भेजकर कर रहे प्रताड़ित...
- एक हफ्ते से भूख हड़ताल मे बैठी पीड़िता
- सुध लेने वाला कोई नहीं
- कौन होगा कामिनी मित्तल कि मौत का ज़िम्मेदार ?
- अधिकारी, मंत्री या फिर प्रशासन से चल रहा शीत युद्ध!
- शासन मौन! प्रशासन मौन! सुनेगा कौन?
मामला रायपुर का हृदय स्थल कहे जाने वाले मोती बाग का है जहाँ चर्चा का विषय मोती बाग की वो 3 एकड़ 50 डिसमिल भूमि हैँ जो प्रथम श्रेणी के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जगन्नाथ राय बहादुर क़े परिवार को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटा के तहत आबंटित हुई.
पिता जगन्नाथ राय बहादुर की भूमि उनकी पुत्री ममता मित्तल को प्राप्त हुई जिसके बाद उनके नाती और नत्निन कु. कामिनी व भाई मीमोह मित्तल को अपनी माँ द्वारा प्राप्त हुई.
उक्त सभी दस्तावेज पक्ष मे होने के बावजूद प्रशासन द्वारा इस परिवार को प्रताड़ित किया जा रहा हैं. वजह हैं राजनितिक रसूखदारों की संलिप्तता . तमाम आदेश व दस्तावेज पक्ष मे होने क़े बावजूद भी 2019 मे कंप्यूटर रिकॉर्ड से उक्त भूमि का डाटा हटा दिया गया. पूर्व पटवारी के द्वारा किये गए इस कार्य की शिकायत की गई. अनेक पत्राचार हुए डाटा पुनः अपडेट करने का आदेश भी पारित हुआ. लेकिन आज दिनांक तक राजस्व रिकॉर्ड मे डाटा कंप्यूटरकृत नहीं किया गया.
वर्तमान मे डाटा ऑनलाइन अपडेट करने के आदेश के बावजूद भी तहसीलदार राममूर्ति दिवान एवं पटवारी कमलेश तिवारी इतने दिनों से टाल मटोल करते रहे.
अधिकारियो के हौसले इतने बुलंद हैं की वे अपने वरिष्ठ जनो के सामने ऐसा व्यवहार करते हैं. जो निंदनीय हैँ. कुछ दिनों पहले की बात हैं संभागायुक्त श्री महादेवन काँवरे के निर्देश पर कामिनी मित्तल कार्यालय मे पहुंची, जिसके बाद उन्हें तहसीलदार राममूर्ति दिवान ने 6 घंटे इंतज़ार करवाया या यु कहा जाये कि, यह इंतज़ार महादेवन काँवरे को कराया गया क्योकि जब एक वरिष्ठ अधिकारी निर्देश करता हैं तो कनिष्ठ वह पहुंचे वो भी पुरे तेवर मे.. बावजूद एक वरिष्ठ अधिकारी की उपस्थिति के उनके व्यक्तित्व से सौम्यता नदारद रही . और फिर कार्यालय पहुंचने के बाद कामिनी मित्तल के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और तहसीलदार दिवान द्वारा कहा गया कि, कामिनी मित्तल का नाम उक्त कंप्यूटर रिकॉर्ड्स मे नहीं जोड़ने का आदेश सीधे मुख्यमंत्री से हैँ. अब सोचने वाली बात यह है कि, किसी राजस्व अधिकारी द्वारा सीधे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का नाम लेकर कामिनी मित्तल को धमकाया जा रहा है.
इससे परेशान होकर बीते 6 दिनों से कामिनी मित्तल भूख हड़ताल पे बैठी हैं लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं छत्तीसगढ़ क़े भूतपूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने भी दो दिन भूख हड़ताल की स्वास्थ्य इतना बिगड़ा की उन्हें हॉस्पीटल जाना पड़ा लेकिन प्रशासन और शासन के कान मे जू तक नहीं रेंगी.
सूत्र बताते हैं और दस्तावेज कहते है फ्रीडम फाइटर कोटा के तहत आबंटित इस जमीन पर पूर्व महापौर एजाज ढेबर की नज़र हैं जिसके द्वारा पूर्व मे जमीन हथियाने के लिए सारे हथकंडे अपनाये गए. घर मे आग लगाने से लेकर दुसरो को सुपारी देने जैसे आरोप तक महापौर ढेबर पर है. इसके आलावा जमीन का पूरा डाटा राजस्व विभाग के ऑनलाइन रिकार्ड से हटाने और फिर दोबारा ना जोड़ने का कार्य कमलेश तिवारी द्वारा किया गया. भ्रष्टाचार की पकड़ इतनी गहरी है कि, सारे आदेश पक्ष मे होने के बावजूद चाहे कोई भी विभाग हो निगम हो या राजस्व चुप्पी साधे बैठे है जिसके चलते पीड़िता को भूख हड़ताल मे बैठना पड़ा. लेकिन आज छठा दिन है और ना ही मुख्यधारा का मीडिया इसपर कोई खबर बना रहा है और ना ही किसी राजनेता कि नज़र यहाँ पड़ रही हैँ. गलियारों मे बात तो यहाँ तक हैँ कि, व्यवस्था सब की हो चुकी हैँ. इसलिए ये चुप्पी तो स्वभाविक हैँ ही. लेकिन सोचने वाली बात हैँ जब एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के घरवालों के साथ ऐसा हो सकता हैँ तो आम आदमी के क्या अधिकार और कहा का सुशासन...
और मामला सिर्फ इतना नहीं है इसके अलावा एक अन्य भूमि मैत्री नगर की हैं. जिसका मुख्यत्यारनामा 1996 से कामिनी मित्तल के नाम हैँ. जिस प्लाट मे बाउंड्री वाल और गेट पे ताला लगा था. उस पर दिनांक एक अप्रैल को सुचना मिली की उक्त प्लाट के गेट मे ताला लगा तोड़कर उसपर अपना ताला लगाया गया जिसकी लिखित रिपोर्ट पुलिस कमिश्नर को दी गयी एवं इस घटना की सुचना आयुक्त महादेवन काँवरे को भी दी गयी जिसके बाद उनकी तरफ से कार्यवाही के लिए डीडी नगर थाना भेजा गया जब थाने पहूँचकर उनसे बात की गयी तो थाना प्रभारी शिवेंद्र राजपूत ने कहा की मामला हमारे संज्ञान मे नहीं है और उनके द्वारा तहसलीदार प्रवीण परमार के पास भेजा गया. उनके पास जाने पर अभद्र व्यवहार करते हुए फाइल फेक दी गयी. और पटवारी आकांक्षा साहू डंगनिया और आर.आई. मुकेश शुक्ला द्वारा अपशब्दों का प्रयोग किया गया.
और इस भूमि के साथ भी वही षड़यंत्र किया जा रहा है.. भू माफियाओ के साथ मिलकर यह पूरा खेला किया जा रहा है और प्रशासन भी पल्ला झाड़ते दिख रही है.
उक्त मोतीबाग के मामले की शिकायत जब कलेक्टर गौरव सिंह को की गयी तो उनके द्वारा भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली.
इससे पहले कलेक्टर सर्वेश्वर भूरे द्वारा कंप्यूटर मे रिकार्ड जोड़ने हेतु आदेश दिया गया था और यह पहली बार नहीं है इससे पहले जी. आर. चुरेंद्र भी आदेश जारी कर चुके है. एवं तत्सबंध मे भू अभिलेख अधिकारी ने भी आदेश दिया था पर
ना तो इसका फ़ौलो अप लिया गया ना ही कोई कार्यवाही हुई इसी कारण पीड़ित महिला कामिनी मित्तल 6 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठी हैं लेकिन विडम्बना ये हैं की उनको खोज खबर लेने संवाद करने कब तक कोई नहीं आया और ये स्थिति तब है जब भूतपूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर इस मामले मे पीड़िता का सहयोग कर रहे है. स्वयं दो दिन वे धरने ओर बैठे रहे और जिसके बाद स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया.
केवल एक अधिकारी की उपस्थिति इस पुरे मामले मे रही वो हैं राकेश देवांगन उनके द्वारा ये कहा गया की इस मामले मे कुछ नहीं हो सकता भूख हड़ताल तोड़ दो. आज 6 दिन हो चुके है बावजूद इसके कोई सुध लेने वाला नहीं है ना ही शासन और ना ही प्रशासन ना संभागायुक्त ना एडीएम, एसडीएम, डीएम किसी ने आना जरुरी नहीं समझा..
आज दिनांक तक ना तो नल कनेक्शन जोड़ा गया ना ही डिजिटल डाटा कम्प्यूटर मे अपडेट किया गया हैँ. सारे कागज़ी आदेश एक रद्दी बनकर रह गए हैँ जिसकी मान्यता शुन्य हैं..
जिम्मेदारो की नज़र भी इस पर नहीं पड़ रही हैं या यु कहे की वे इससे पल्ला झाड रहे है.
तमाम परिस्थितियों को देखते हुए बस एक ही लाइन समझ आती है "समर्थ को नहीं दोष गोसाई "
जवाबदेही केवल एक झुनझुना हैँ, जो तभी बजता है जब बजाने वाला रसूखदार हो या फिर बात निजी हित की हो...
खैर देखना ये है की अब जिम्मेदारो को कब यह महसूस होता है की विषय गंभीर हैँ और कार्यवाही करने के लायक है क्योंकि हर तबका तो इतना समर्थ नहीं होता कि,व्यवस्था कर सके. और शायद इसी का नाम लोकतंत्र है संविधान केवल किसी एक वर्ग या व्यक्ति नहीं बल्कि पुरे समाज के लिए बना है..
हालांकि संविधान को अगर एक तलवार माना जाये तो कब उसे मयान मे रखना है और कब उसे बाहर निकालना है ये उसे चलाने वाले के ऊपर निर्भर करता हैँ.
और विडम्बना यह हैँ कि,इस विवेक का प्रयोग व्यक्ति या वर्ग परक हो चला हैँ... जिसका निदान आवश्यक है क्योंकि ये ऐसे तत्त्व है जो समाज को ना केवल आगे बढ़ने से रोकते है बल्कि एक ऐसी छवि निर्मित करते है जो उच्च पटल पर अपने राष्ट्र को ही पिछड़ा और खोखला करने का कार्य कर रहे हैँ..










